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माँ – Maa.n/Mother [Poems] [Tribute]

गुलज़ार साब के जन्मदिन पर प्रस्तुत है उनकी एक अनूठी पर्सनल नज़्म जो उन्होनें अपनी माँ को समर्पित की है! तुझे पहचानूंगा कैसे? तुझे देखा ही नहीं ढूँढा करता हूं तुम्हें अपने चेहरे में ही कहीं लोग कहते हैं मेरी आँखें मेरी माँ सी हैं...

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