होली के रंगों में एक रंग और : गुलज़ार साब की एक त्रिवेणी जो आज के दैनिक भास्कर के होली विशेष में शामिल हुई है
ज़रा पैलेट सम्भालो रंगोबू का
मैं कैनवास आसमां का खोलता हूंबनाओ फिर से सूरत आदमी की!
साथ में एक और रंग बोनस में.. ईद के चाँद पर होली का रंग!
जहां नुमा एक होटल है नां…
जहां नुमा के पीछे एक टी.वी. टॉवर है नां…
चाँद को उसके ऊपर चढ़ते देखा था कल!होली का दिन था
मुंह पर सारे रंग लगे थे
थोड़ी देर में ऊपर चढ़ के
टांग पे टांग जमा के ऐसे बैठ गया था,
होली की खबरों में लोग उसे भी जैसे
अब टी.वी. पर देख रहे होंगे!!
Source : Dainik Bhaskar, March 10, 2009, Page 17 link
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